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सेवा के लिए समर्पित

सेवा के अपने जुनून और ओपन सोर्स तकनीक की मदद से एक पूर्व सैनिक ऐसी दुनिया बनाने में लगा है जिसमें सब साथ मिल कर आगे बढ़ें.

मैट ने दो बार इराक का दौरा किया और वहां उनका काम अपाचे हेलिकॉप्टर उड़ाना था. इन जटिल विमानों की मरम्मत और रखरखाव करने वाली इंजीनियरिंग टीम के साथ मिलकर काम करते हुए मैट ने करीब से जाना कि इंजीनियर क्या कमाल के काम कर सकते हैं. इससे घर वापस लौटने के बाद उन्हें इंजीनियर बनने की प्रेरणा मिली.

मैट लैंडिस के लिए, पूर्व-सैनिक का मतलब “ऐसा इंसान जो पहले सेना में था” से कहीं ज़्यादा है. मैट अब ऐसी चीज़ पर काम कर रहे हैं जिससे उनके ऑटिज़्म से पीड़ित बेटे और दूसरे लोगों को ज़्यादा आज़ादी से जीवन जीने का मौका मिल सके. अपने काम के ज़रिए मैट साबित कर रहे हैं पूर्व-सैनिक कभी भी दूसरों की सेवा करना नहीं छोड़ता है.

बहुत सारे पूर्व-सैनिकों की तरह, अपाचे लड़ाकू विमान उड़ाने वाला यह पूर्व-पायलट खुद को हीरो नहीं मानता है. इराक में दो बार मिशन पर जाकर लौटने के बाद मैट को पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझना पड़ा, जो एक गंभीर दिमागी चोट है. साथ ही उन्हें इस बेचैनी से भी जूझना पड़ा कि अब वह एक बड़े मिशन का हिस्सा नहीं हैं. वह अपना मकसद खो चुके थे.

जब उन्होंने The Mission Continues नाम के समूह की ओर से शनिवार के दिन आयोजित होने वाले सेवा इवेंट के बारे में सुना, तो उन्होंने उसमें तुरंत शामिल होने का फ़ैसला कर लिया. यह पूर्व-सैनिक वॉलंटियर का एक समूह है. “आप समझ नहीं सकते कि मैं सैनिकों को कितना याद करता था? सेना छोड़ने के बाद शायद ही मैं किसी ऐसे व्यक्ति को जानता था जो सेना में हो या पूर्व-सैनिक हो. इसी वजह से मैं काफ़ी अकेलापन महसूस कर रहा था.”

मैट को उम्मीद थी कि इस इवेंट से उन्हें अकेलेपन से राहत मिलेगी, लेकिन उन्होंने पाया कि इससे असल में उनकी कहीं ज़्यादा गहरी चाहत पूरी हुई और वह चाहत थी, लोगों की सेवा कर पाने की उनकी इच्छा. लगभग रात भर में ही उनके सामने पूर्व सैनिक की परिभाषा स्पष्ट हो उठी: पूर्व-सैनिक को हमेशा सेवा करनी होती है. और इस एहसास के साथ मैट को ज़िंदगी का नया मकसद मिल गया – और इसकी शुरुआत उनके घर से ही हुई.

जब आप सेना छोड़ते हैं, तो सैनिक होने का तमगा आपसे छीन लिया जाता है और आपके नाम के साथ पूर्व-सैनिक जुड़ जाता है और वे आपको बताते भी नहीं हैं कि पूर्व-सैनिक का मतलब क्या होता है.
मैट लैंडिस

कई पूर्व-सैनिक वॉलंटियर के साथ काम करने से सेवा को लेकर मैट की प्रतिबद्धता फिर से जाग उठी. लेकिन उनके भीतर क्या करने की क्षमता थी, इसे सामने लाने में परिवार, दोस्तों और एक बेहतरीन गुरु ने बड़ी भूमिका अदा की.

लगभग 20 साल पहले, 4 जुलाई को मैट और टिफ़ एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए थे. तीन बच्चों और दो बार मिशन पर जाने के बाद उनका रिश्ता, पति-पत्नी के रिश्ते से कुछ ज़्यादा हो गया है – वे साथ में काम करके न सिर्फ़ अपना परिवार चलाते हैं, बल्कि पिट्सबर्ग में रहने वालों के एक बड़े समुदाय के लिए काम भी करते हैं.

मैट कहते हैं, “मेरे तीनों बच्चे विकलांगता से पीड़ित हैं और मैं देख सकता हूं कि यह देखने में बहुत छोटी है, मगर यह उनकी ज़िंदगियों पर बहुत गहरा असर डालती है.” लैंडिस परिवार के तीन बच्चे ऑटिज़्म नाम की समस्या से जूझ रहे हैं और इसके चलते इस परिवार को सामान्य लोगों के लिए बनी इस दुनिया में विकलांगता की चुनौती का सामना करना पड़ा है. लेकिन 15 साल के ट्रिस्टन लैंडिस बातचीत नहीं कर पाते हैं और उन्हें अपने रोज़मर्रा के कामों में भी परेशानी होती है, इसलिए परिवार को उनके साथ तालमेल बैठाना पड़ा.

मैट की पत्नी टिफ़ कहती हैं, “बेशक हमें बहुत सारी परेशानियों और उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा.” लेकिन उनका मानना है हर चुनौती उन्हें और करीब लाती है. वह यह भी मानती हैं कि परिवार ने जिस तरह धीरज रखा है, उससे बच्चों ने भी काफ़ी कुछ सीखा है. वह कहती हैं, “हमारे लिए सबसे ज़रूरी हम हैं.” चीज़ों के मुताबिक ढलना, एक-दूसरे की मदद करना और साथ मिलकर आगे बढ़ना लैंडिस परिवार के मूल्यों में शामिल है.

मैट और ट्रिस्टन जब बाहर जाते हैं, तो वे एक-दूसरे का हाथ थामे रहते हैं और शोर-शराबे और भीड़ से बचते हैं. मैट अपने बेटे के व्यवहार, उसके फड़फड़ाते हाथों और यहां तक कि उसकी तेज़ और गहरी सांसों से उसकी परेशानी को कुछ हद तक महसूस कर पाते हैं. वह इन सभी का मुकाबला करने में ट्रिस्टन की मदद करते हैं. वह दांतों को ब्रश करने, कपड़े पहनने और खाना खाने में उसकी मदद करते हैं.

मगर वह ट्रिस्टन के साथ बातचीत नहीं कर पाते हैं.

मैट इस बात का इंतज़ार बिल्कुल नहीं करने वाले थे कि कोई और विकलांग लोगों की मदद के लिए तकनीकें विकसित करे ताकि वे लोग ज़्यादा आज़ादी से अपनी ज़िंदगी जी सकें – वह खुद इसे बनाने के लिए तैयार थे.

जेस बुर्कमन, लैंडिस परिवार की दोस्त हैं और इस परिवार ने देखा है कि कैसे उन्होंने अपनी विकलांगता पर जीत हासिल की है – इससे मैट को ऐसे और भी तरीके ढूंढने की प्रेरणा मिलती है जिनकी मदद से विकलांग लोग समाज में अपना ज़्यादा से ज़्यादा योगदान दे सकें.

पिट्सबर्ग की ह्यूमन इंजीनियरिंग रिसर्च लैबोरेट्रीज़ (HERL), लोगों की मदद के लिए नई तकनीकें विकसित करने वाली देश की बेहतरीन प्रयोगशाला है. डॉ. कूपर की देखरेख में काम करने वाली इंजीनियरों, इंटर्न, छात्रों और शोधकर्ताओं की इस टीम को देखते ही मैट ने इससे जुड़ने का फ़ैसला कर लिया. इस टीम के कई लोग विकलांगताओं के साथ जी रहे हैं या पूर्व-सैनिक हैं. HERL मैट का नया ऑफ़िस बन गया है, जहां बहुत खास तरह का काम होता है: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के लिए नई तरह की मददगार तकनीकें विकसित करना.

मैट और उनकी टीम को एक हार्डवेयर पर काम करते हुए देखकर आप महसूस कर सकते हैं कि वे विकलांग लोगों की ज़िंदगी में आ सकने वाली हर तरह की परेशानियों के बारे में हमेशा सोचते रहते हैं और उसे दूर करने की कोशिश में लगे रहते हैं. ऐसी ह्वीलचेयर जो फ़ुटपाथ जैसी ऊंची जगहों पर चढ़ सकती हैं और उन पर बैठे व्यक्ति गिरते भी नहीं हैं. बस उंगलियों से चलने वाला एक रोबोट हाथ जो दरवाज़ा खोल सकता है या लाइट का स्विच दबा सकता है. एक ताकतवर हाथ जो किसी व्यक्ति को ह्वीलचेयर से उठाकर अलग-अलग जगहों पर ले जा सकता है. इसकी वजह से, इसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की देखभाल के लिए कम लोगों की ज़रूरत पड़ती है और व्यक्ति ज़्यादा आत्मनिर्भर भी बनता है.

मैट लैंडिस के लिए, पूर्व-सैनिक का मतलब “ऐसा इंसान जो पहले सेना में था” से कहीं ज़्यादा है. मैट अब ऐसी चीज़ पर काम कर रहे हैं जिससे उनके ऑटिज़्म से पीड़ित बेटे और दूसरे लोगों को ज़्यादा आज़ादी से जीवन जीने का मौका मिल सके. अपने काम के ज़रिए मैट साबित कर रहे हैं पूर्व-सैनिक कभी भी दूसरों की सेवा करना नहीं छोड़ता है.

वह कहते हैं, “यह मेरे लिए हमेशा से मुश्किल रहा है और मुझे यह समझने में कुछ वक्त लगा कि जब आपको कोई ‘आप जो कर रहे हैं, उसके लिए शुक्रिया’ या ऐसा कुछ और कहता है तो, उसका जवाब कैसे देना चाहिए.” मगर पिट्सबर्ग आने के बाद, मैट ने यह सीख लिया है कि जब लोग उन्हें उनके काम के लिए धन्यवाद दें, तो उन्हें क्या कहना चाहिए: उन्हें लोगों को इस काम से जुड़ने के लिए कहना चाहिए.

वह धन्यवाद देने वाले लोगों से कहते हैं, “आप भी मेरे साथ जुड़ें.” “आप भी मेरे साथ मिलकर सेवा करें. आप सेवा के बारे में बात करना चाहते हैं या हमारी तारीफ़ करना चाहते हैं, तो आएं और हमारे साथ मिलकर सेवा का यह काम करें, क्योंकि हमें आपकी बेहद ज़रूरत है. हम चाहते हैं कि लोग आएं और हमारे साथ मिलकर ऐसे बदलाव लाने की कोशिश करें, जो हम अपने समुदाय में देखना चाहते हैं और इस बदलाव का हिस्सा बनें.”

“और फिर, बहुत से लोग हमारी इस कोशिश से जुड़ते भी हैं.”

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